डॉ. दिनेश्वर प्रसाद का जन्म 4 जनवरी, 1932 को मयदरियापुर, मुंगेर, बिहार में हुआ था। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) तथा राँची विश्वविद्यालय से डी.लिट् की उपाधि प्राप्त की। पटना विश्वविद्यालय में हिन्दी व्याख्याता के रूप में शुरुआत करने के बाद वे कालान्तर में प्रोफ़ेसर होकर राँची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष तथा मानविकी संकायाध्यक्ष रहे। अपनी 17 पुस्तकों के अलावा उन्होंने फ़ादर कामिल बुल्के के साथ मिलकर भी 3 पुस्तकें लिखीं। फ़ादर के ‘अँगरेज़ी-हिन्दी कोश’ में उनका महती योगदान रहा और फ़ादर के निधन के बाद वे इसके अगले संस्करणों का संशोधन-परिवर्द्धन करते रहे।
‘डॉ. बुल्के स्मृतिग्रन्थ’ के सम्पादक-मंडल में रहे और नेशनल आर्काइव्ज़ के लिए फ़ादर का साक्षात्कार भी लिया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘लोक साहित्य और संस्कृति’, ‘मिथक, प्रतीक और कविता’, ‘प्रसाद की विचारधारा’, ‘हॉफमैन ऑन मुंडारी पोएट्री’, ‘मानस, कामायनी और उर्वशी’, ‘मुंडारी शब्दावली : अखिल भारतीय सन्दर्भ’, ‘प्रसाद की साहित्य दृष्टि’, ‘भारतीय साहित्य के निर्माता : फ़ादर कामिल बुल्के’, ‘एक ईसाई की आस्था—रामकथा और हिन्दी’। ‘मैं इस पृथ्वी को कभी नहीं भूलूँगा’ (वॉल्ट ह्विटमन की कविताओं का अनुवाद)। उन्हें ‘केन्द्रीय हिन्दी संस्थान का राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार (दिल्ली, 2006)’, ‘साहित्य सेवा सम्मान (बिहार राष्ट्रभाषा परिषद, पटना, 1995)’, ‘राधाकृष्ण पुरस्कार (राँची एक्सप्रेस, 1997)’, ‘अक्षरकुम्भ सम्मान (जमशेदपुर 2008)’ और ‘झारखंड गौरव’ सहित अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले। उनका निधन 13 अप्रैल, 2012 को राँची में हुआ।

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