डॉ. नैया
डॉ. नैया ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.फिल., पी-एच.डी. किया है। स्त्री कथा साहित्य और हिन्दी नवजागरण (1877-1930) उनके शोध का विषय है, जो पुस्तकाकार प्रकाशित है। उन्होंने आधुनिक हिन्दी साहित्य की कई अलक्षित लेखिकाओं की रचनाओं की खोज की है जिनमें अबलाओं का इंसाफ (स्फुरना देवी) और छोट के चोर (मोहिनी चमारिन) प्रमुख हैं।
नवजागरणकालीन स्त्री कथा-साहित्य की गम्भीर अध्येता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली डॉ. नैया ने कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का सम्पादन किया है जिनमें प्रमुख हैं—अबलाओं का इंसाफ, उपन्यास का लोकधर्म, हृदय का काँटा, हुक्म देवी, आदर्श बालिका, सच्चा पतिप्रेम, भगवानदास मोरवाल : चुनी हुई कहानियाँ, संलाप : भगवानदास मोरवाल के साक्षात्कार।
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