प्रभात सिंह
प्रभात सिंह की फ़ोटोग्राफ़ी का शगल उन्हें अख़बार की दुनिया में ले गया। अरसे तक ‘अमर उजाला’ के सम्पादक रहे, मगर कैमरा हाथ से नहीं छूटा। तसवीरें उतारते और उनकी नुमाइश करते रहे हैं। थारू जनजाति पर एक मोनोग्राफ़, कुम्भ के मेले पर डायरी और अपने शहर पर एक किताब ‘ज़ीरो माइल बरेली’ लिखी है, दो किताबें अख़बारनवीसी पर भी हैं। अभी समाचार एजेंसी ‘संवाद न्यूज़” के सम्पादक हैं। राजकमल प्रकाशन से उनके अनुवाद में मार्क टली की किताब ‘धीमी वाली फ़ास्ट पैसेंजर’, रस्किन बॉन्ड की आत्मकथा ‘अपनी धुन में’, एस. इरफ़ान हबीब की ‘मौलाना आज़ाद : एक जीवनी’ और नेहा दीक्षित की किताब ‘कोई एक सईदा’ प्रकाशित हैं।
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