शि वदानसिंह चौहान
शिवदानसिंह चौहान (1918-2000) हिन्दी में मार्क्सवादी आलोचना के प्रमुख हस्ताक्षर के रूप में जाने जाते हैं। हिन्दी की प्रसिद्ध पत्रिका ‘आलोचना’ के सम्पादक भी रहे। उन्होंने और उनकी पत्नी विजय चौहान ने संयुक्त रूप से विश्व साहित्य की अनेक श्रेष्ठ कृतियों के अनुवाद किए जिनमें ‘जुर्म और सज़ा’ (दोस्तोयेव्स्की), ‘संघर्ष’ (चेखव), ‘एक औरत की ज़िन्दगी’ (मोपासां), ‘दो शहरों की दास्तान’ (चार्ल्स डिकेन्स), ‘प्लेग’ (कामू) आदि शामिल हैं।

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