प्रस्तुत कृति में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के उपन्यासों और उनमें वर्णित उदात्त पात्रों की जीवन-दृष्टि को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में उपन्यासों का सामान्य परिचय स्त्री-चरित्र शिल्प और पुरुष-चरित्र शिल्प के विभिन्न पक्षों को समाहित करते हुए उनकी विशेषताओं को उदघाटित करने का प्रयास करने के साथ चरित्र-शिल्प की दृष्टि से द्विवेदी जी का महत्त्व दर्शाया गया है। आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की प्रतिभा ने अतीतकालीन चेतना प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़कर आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त की है। उनकी विपुल रचना साहित्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। प्रस्तुत पुस्तक शोधार्थियों तथा पाठकों का मार्गदर्शन करने में सहायक सिद्ध होगी।

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