उपन्यास बदलाव सामाजिक न्याय के संघर्ष की दास्तां है जहां विद्यमान व्यवस्था से लाभान्वित वर्ग येन-केन-प्रकारेण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए तमाम हथकंडे अपनाता है तो वहीं व्यवस्था से पीड़ित वर्ग व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए संघर्ष करता है। सामाजिक न्याय के लिए बहुत लोगों ने लम्बे समय तक संघर्ष किया है तथा इसके लिए अपनी कुर्बानियां दी हैं। उपन्यास बदलाव समाज में समता और बंधुत्व के महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय समाज में हो रहे बदलाव का श्रेय अंततः संविधान को जाता है जो नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता आदि की गारंटी देता है। हम भारत के लोग की महान भावना से निर्मित, भारत का संविधान, सभी जाति, धर्म, पंथ, भाषा, वेशभूषा, या क्षेत्र के सभी नागरिकों को समान अधिकार और उत्तरदायित्व देता है। संविधान निर्माताओं ने अनेकता में एकता को पिरोया है। संविधान ने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया है जहां देश की जनता, अपने लिए, अपने वोट की ताकत से, खुद सरकार चुनती है और चुनी हुई सरकार जनता के लिए जवाबदेह होती है। संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि कोई भी भारतीय नागरिक, अपनी क्षमता और कौशल से, बिना किसी भेदभाव के निम्न स्तर से उच्चतम पद पर आसीन हो सकता है।

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