‘बंदर और भालू’ सामाजिक स्थितियों में मदारी और उसके बारे में बनी बाल सुलभ जिज्ञासाओं की कहानी है। मदारी किस तरह जानवरों की कलाकारी दिखाकर आजीविका चलाता है यह रोचकता के साथ तब उजागर होता है जब बंदर और भालू एक दिन बिना मदारी के ही लोगों के बीच कलाकारी दिखाने चल पड़ते हैं। चित्रकार चंचल द्वारा बनाए गए चित्रों से इसकी महत्ता और अधिक बढ़ गई है।

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