‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ नामक इस पुस्तक की रचना एक व्यापक रूपरेखा के तहत की गई है। यह एक सुदीर्घ शोधकार्य का नतीजा है, जिसका निर्देशन प्रो. बिपिन चंद्र ने किया। यह शोध केवल संग्रहालयों, निजी व संस्थाओं से प्राप्त सामग्री के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि इसमें स्वतंत्रता आन्दोलन के समय के समाचार-पत्रों तथा आन्दोलन में आधार-स्तर पर शामिल रहे लोगों के अनुभवों, उनके साक्षात्कारों का भी उपयोग किया गया है। कह सकते हैं कि भारतीय इतिहास के इस विशिष्ट काल खंड, और उससे भी अधिक उस आन्दोलन के विषय में हमें यहाँ एक प्रचुर तथ्य प्राप्त होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज हम एक स्वतंत्र देश के नागरिक हैं।
यह पुस्तक भारत के स्वाधीनता आन्दोलन की उन विशेषताओं को ख़ासतौर पर रेखांकित करती है जिनके चलते यह मुहिम केवल असहमति और नकार की गतिविधि नहीं, बल्कि एक रचनात्मक और भविष्योन्मुखी, व्यापक मानवीय सरोकारों से प्रतिबद्ध सजग कार्रवाई थी।
लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, आत्मनिर्भरता, समतावादी समाज-व्यवस्था, स्वतंत्र विदेश नीति, अभिव्यक्ति और संगठन की आज़ादी, समग्र आर्थिक विकास, ग़रीबों की पक्षधरता और व्यापक अन्तरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के जिन मूल्यों को आधार बनाकर भारत का स्वाधीनता आन्दोलन चला, और जो स्वतंत्र भारत के आधार-मूल्य बने, उन्हें यह पुस्तक तथ्यों और सन्तुलित विश्लेषण के साथ रेखांकित करती है।
छात्रों के साथ-साथ आधुनिक भारत के इतिहास में रूचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष उपयोगी।

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