‘भवानी के गाँव का बाघ’ एक लघु उपन्यास है। इसमें बाघ जैसे वन्य जीव की आजीविका के संकट को मनुष्य मात्र के लिए चुनौतीपूर्ण बतलाया है। यही नहीं मास्टर जी समझाते हैं कि जानवरों की जगह पर जब आदमी चला गया, तो जानवर आदमी की बस्ती में आने लगे। प्रकृति ने तो बाघ जैसे जानवरों के लिए जंगल में ही प्रबंध कर रखा था, पर आदमी ने उनके घर को उजाड़ दिया।

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