बच्चों को खेल-खेल में अपने परिवेश से जोड़ने का कार्य करते हुए कई विशिष्ट अनुभव होते हैं। ये अनुभव नई जिज्ञासाओं और जीवन की सूक्ष्म अनुभूतियों से जुड़े होते हैं। बच्चों के खेल भी निराले और अनोखे-अनूठे होते हैं। इस रूप में वे सीखते भी हैं और नई-नई प्रेरणा भी पाते हैं। जब बच्चे आपस के विवाद में पड़ जाते हैं तो चाची उन्हें समझाती हैं कि इनसान की जैसी कथनी, वैसी करनी होनी चाहिए।

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