भारत में लोककथाओं की पुरानी परम्परा रही है। कुछ वर्षों पूर्व तक वह श्रुति साहित्य के रूप में प्रचलन में था लेकिन हाल के वर्षों में विभिन्न अंचलों की लोककथाओं को संग्रहीत कर पुस्तकाकार रूप दिया जा रहा है। यह पुस्तक भी उसी की एक कड़ी है। इसमें ‘चम्पा और केतकी’, ‘अभागिन सौभागिन’, ‘राजा का सपना’, ‘व्यापारी’, ‘बुरे कर्म का बुरा फल’ जैसी छोटानागपुर की प्रसिद्ध लोककथाएँ संकलित की गई हैं।

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