नवसाक्षर प्रौढ़ों के लिए लिखित ये कहानियाँ नई नहीं हैं। दो कहानियाँ बृहत्कथा से ली गई हैं—एक लोक प्रचलित है और एक मौलिक। इस तरह कुल चार कहानियाँ हैं। हाँ, इनका पुनर्लेखन तथा इनकी कथावस्तु में लेखक ने थोड़ी फेर-बदल नवसाक्षर प्रौढ़ों को सामने रखकर की है। लेखक का मानना है कि नवसाक्षर प्रौढ़ों को इन कहानियों से अगर अपने सामाजिक दायित्व को समझने में सहायता मिले तो इनकी सार्थकता है।

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