किसी भी व्यक्ति का जीवन सिर्फ़ तारीख़ों और घटनाओं का योग नहीं होता। जीवन वह प्रभाव भी होता है जो वह व्यक्ति अपने विचारों और कार्यों से किसी दूसरे के मन-मस्तिष्क पर छोड़ता है। वास्तव में किसी व्यक्ति का जीवन दूसरों की, चाहे वे स्वजन हों या परजन, स्मृतियों में ही अमरता प्राप्त करता है।
‘चरैवेति : एक जीवन-यात्रा’ ऐसी ही एक जीवन-गाथा है—एक पुत्र के हाथों लिखी गई पिता की गाथा। लेखक ने अपने पिता के विराट व्यक्तित्व के जिन-जिन पक्षों को जाना, जिन-जिन गुणों का साक्षात्कार किया, उन सबको इस पुस्तक में दर्ज करने की सफल कोशिश की है। लेखक के सामने पिता की जो छवि रही है, वह है ज्ञान के भंडार और सबकी मदद के लिए तत्पर एक सहृदय इनसान की छवि। लेकिन यह छवि इतने तक सीमित नहीं है, उसके और भी अनेक पक्ष हैं—साहित्य हो या मनोविज्ञान, धर्म हो या अध्यात्म, खेल हो या व्याकरण—तमाम विषयों पर उनकी गहरी पकड़ थी। लेखक ने पूरे मनोयोग से इस छवि को शब्द-रूप दिया है।
एक अत्यन्त पठनीय पुस्तक!

Loading, please wait...

