प्रकृति ज्ञानोपार्जन की पहली पाठशाला है। वस्तुबोध के विकसित होते ही बालक सबसे पहले प्रकृति की ओर आकर्षित होता है। यहीं से अंकुरित होती है उसके बाल-मन में जिज्ञासा, जो आयु बढ़ने के साथ-साथ विकसित होती रहती है। यूँ तो जीवन के विविध रूपों के बारे में इतनी अधिक जानकारी सुलभ है कि प्रत्येक पर एक अलग पुस्तक लिखी जा सकती है, किन्तु लेखक का उद्देश्य ज्ञान-कोश लिखने का नहीं है, बल्कि अनेक रूपों से पाठकों का परिचय भर करवाकर उनके विषय में कुछ रोचक तथ्य प्रस्तुत करना है।

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