इस पुस्तक में कबीर के काव्य के सभी पक्षों पर विचार किया गया है। विभिन्न प्रकरणों में कवि के जीवन, दार्शनिक चिन्तन, उसकी आध्यात्मिक दृष्टि, साधना की भाव-भूमि और मानवीय जीवन के सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक परिवेश के साथ उसकी सारी मूल्य प्रक्रिया के विविध पक्षों को विवेचित किया गया है। अन्त में काव्य की रचना दृष्टि के आधार पर सम्पूर्ण काव्य पर विचार हुआ है। इस प्रकार यह सारा कबीर का अध्ययन अपने आप में एक विशेष दृष्टि से प्रस्तुत करने का प्रयत्न है। कहाँ तक इस कार्य में सफलता मिल सकी है, इसका तो सुधी पाठक- वर्ग ही प्रमाण है।

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