‘मूर्खों का मूर्ख’ चार बाल-कहानियों का संग्रह है। इसमें ‘हकीम जमालगोटा’, ‘मूर्खों का मूर्ख’, ‘चार मूर्ख’ और ‘तीसमार खाँ’ शीर्षक चार कहानियाँ हैं। बाल-कहानियों के रूप में संवादों और कथानक की सरलता इन्हें पठनीय बनाती हैं। ये चारों कहानियाँ पाठकों को सुरुचिपूर्ण मनोविनोद का अवसर देती हैं।

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