एक ख़ास योजना के तहत हिन्दी के दस प्रमुख कथाकारों द्वारा लिखी गईं ये कहानियाँ भारतीय समाज में शहरीकरण से पैदा होनेवाले बदलावों को रेखांकित करती हैं।
दस अलग-अलग शहरों पर केन्द्रित इन कहानियों में नागरिक जीवन का एक बड़ा यथार्थ तो उभरकर आया ही है, नगरों की उन कठिनाइयों पर भी प्रकाश डाला गया है जो ख़ासकर रात में ही पैदा होती हैं। बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में भारतीय समाज कौन-सा नया रूप ग्रहण कर रहा है, उसकी सांस्कृतिक चेतना किस ओर अग्रसर हो रही है, व्यक्ति का संघर्ष क्यों सामाजिक संघर्ष का रूप नहीं ले रहा है आदि जैसे हमारे समय के कुछ अहम सवालों की ओर ही इशारा नहीं करती हैं ये कहानियाँ बल्कि, अपनी तरह से इनके जवाब भी तलाशती हैं।

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