कौन आएगा!
किसकी आहट पर मिट्टी के कान लगे हैं!
ख़ुशबू किसको ढूँढ रही है!
शबनम का आशोब समझ
और देख कि उन फूलों की आँखें
किस का रस्ता देख रही हैं
किसकी ख़ातिर
क़रया-क़रया
जाग रहा है
सूना रस्ता गूँज रहा है
किसकी ख़ातिर!!
तनहाई के हौल नगर में
शब-भर गिरते पत्तों की आवाज़ें
चुनता रहता हूँ
अपने सर पर तेज़ हवा के नौहे
सुनता रहता हूँ

Loading, please wait...
