यह पुस्तक विवाह और स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर एक समग्र अध्ययन है। मूल मराठी में कई संस्करणों में पढ़ी जा चुकी यह क्लासिक कृति न सिर्फ़ मानव समाज में विवाह संस्था के इतिहास तथा स्वरूपों पर विचार करती है, बल्कि एक साधारण दम्पति के लिए सुखमय वैवाहिक जीवन की व्यावहारिक मार्गदर्शिका भी उपलब्ध कराती है।
विश्व के विभिन्न क्षेत्रों तथा इतिहास के अलग-अलग चरणों में स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की रूढ़ियों और रूपों की जो विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में जुटाई गई है, वह जहाँ सेक्स से सम्बन्धित हमारे जड़ पूर्वग्रहों को भंग करती है, वहीं स्वस्थ और सन्तुलित यौन जीवन का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिन विषयों को यह कृति अपने दायरे में लेती है, उनमें से कुछ हैं : विवाह संस्था का स्वरूप, भविष्य व संरचना; विवाह में साथी का चुनाव, जननेन्द्रियों की रचना, कामपूर्ति, सन्तति नियोजन, मातृत्व, यौन-विकृतियाँ, मनोविकृतियाँ तथा वैवाहिक जीवन का मानसिक पक्ष आदि।

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