अक्का महादेवी
अक्का महादेवी का जन्म 12वीं शताब्दी मेंकर्णाटक में हुआ था। वह भगवान शिव को अपना पति मानती थीं। उन्होंने अपने आप को पूरी तरह से शिव की भक्ति में समर्पित कर दिया था। जब वे युवा हुईं तो स्थानीय राजा उन के अप्रतिम सौन्दर्य पर मुग्ध हो गया।परिवार ने उनका विवाह राजा से कर दिया, पर अक्का महादेवी इस लौकिक सम्बन्ध से उदासीन रहीं। उन्होंने खुद को शिव कि प्रति समर्पित रखा और राजमहल छोड़ दिया। उन्होंने वस्त्र और आभूषण भी त्याग दिए और शिव को समर्पित सैंकड़ों वचन लिखे। उनका निधन अल्प आयु में ही हो गया। उनके कन्नड़ में रचे गए वचन आज समूचे दक्षिण भारत में प्रचलित हैं। उन्हें वीरशैव सम्प्रदाय के महान भक्तों में शुमार किया जाता है।

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