अनन्त भटनागर
डॉ. अनन्त भटनागर की सृजनात्मक ऊर्जा साहित्यिक लेखन के साथ-साथ सामाजिक आन्दोलनों में प्रस्फुटित होती रही है। कविता, व्यंग्य एवं आलोचना विधा में सक्रिय डॉ. भटनागर की छवि सूक्त रूप में गम्भीर व व्यंग्यात्मक रचनाकार की है। मानवाधिकार आन्दोलन से लम्बे जुड़ाव के कारण उनके रचनात्मक सरोकार मानवीय संवेदना के निकट रहे हैं।
‘समय के साथ’ शीर्षक से उनका प्रथम काव्य-संग्रह प्रकाशित हुआ है। देश के प्रमुख समाचार पत्रों में उनके व्यंग्य के स्तम्भ चर्चित रहे हैं। प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में उनके लेख व कविताएँ निरन्तर प्रकाशित हुए हैं। बोर्ड एवं विश्वविद्यालयों में उनके द्वारा सम्पादित पुस्तकें पाठ्यक्रमों में रही हैं।
देश के प्रमुख मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज के राज्य महासचिव के पद पर कार्यरत डॉ. भटनागर धर्मनिरपेक्षता, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा, बाल अधिकार, मानवाधिकार शिक्षण आदि विविध क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। वे राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ, स्पिक मैके, प्रबुद्ध मंच, भारत ज्ञान विज्ञान समिति व साहित्य संगम से भी जुड़े हैं।
‘सागर से आकाश तक’ उनकी प्रथम नाट्य-कृति है।
आजकल डॉ. भटनागर विजय सिंह पथिक श्रमजीवी महाविद्यालय, अजमेर में प्राचार्य तथा द टर्निंग पॉइंट पब्लिक स्कूल में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

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