चित्रा सिंह
हिन्दी की सक्रिय कथाकार रही हैं, परन्तु कुछ समय से गृहस्थी में व्यस्तता के कारण उन्होंने लेखन पर ध्यान देना बन्द कर दिया था।
पेशे से शिक्षिका रहीं, इस लेखिका की भाषा शैली में पुरातन और नए साहित्यिक प्रयोगों की छवियाँ एक साथ अनुभव की जा सकती हैं।
अपने पहले उपन्यास में चित्रा जी ने अपने 30 वर्षों के पारिवारिक तथा निजी जीवन को ही अद्भुत शब्द संयोजन के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

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