हिमांशु बाजपेयी
हिमांशु बाजपेयी पक्के लखनउवा हैं। वो ख़ुद को उसी चौक यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट कहते हैं, अमृतलाल नागर ख़ुद को जिसका वाइस-चांसलर कहते थे। चौक की गलियों में चहलक़दमी उनका पसन्दीदा काम है। इन्हीं के बीच 12 जून, 1987 को पैदा हुए और यहीं पले-बढ़े। उनके मुताबिक़ पुराने लखनऊ की गलियों में बेसबब भटकना ऐसे है जैसे आप महबूबा की ज़ुल्फ़ के ख़म निकाल रहे हों। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से लखनऊ के ऐतिहासिक नवल किशोर प्रेस पर पीएच.डी. की है। दास्तानगोई के जाने-पहचाने फ़नकार हैं। लखनऊ के समाज और संस्कृति पर दीवानावार लिखते हैं। बाहरवालों को अपनी नज़र से लखनऊ दिखाने और लखनऊवा क़िस्से सुनाने के लिए मशहूर हैं।

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