जवरीमल्ल पारख
जवरीमल्ल पारख का जन्म 1952 में जोधपुर, राजस्थान में हुआ। उन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। 1975 से 1987 तक अमरोहा, उत्तर प्रदेश के एक पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में फिर 1987 से 2017 तक इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में अध्यापन किया। 2017 में प्रोफ़ेसर पद से सेवानिवृत्त हुए। साहित्य, मीडिया, सिनेमा और संस्कृति के विभिन्न विषयों पर नियमित लेखन के साथ-साथ इग्नू और अन्य शैक्षिक संस्थानों के लिए शैक्षिक एवं कथात्मक पटकथा लेखन तथा देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों में पत्र-वाचन करते रहे हैं।
उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘साहित्य, कला और सिनेमा : अन्तःसम्बन्धों की पड़ताल’, ‘भूमंडलीकरण और सिनेमा में समसामयिक यथार्थ’, ‘हिन्दी सिनेमा में बदलते यथार्थ की अभिव्यक्ति’, ‘साझा संस्कृति’, ‘साम्प्रदायिक आतंकवाद और हिन्दी सिनेमा’, ‘हिन्दी सिनेमा का समाजशास्त्र’, ‘लोकप्रिय सिनेमा एवं सामाजिक यथार्थ’ (सिनेमा); ‘प्रगतिशील आन्दोलन और नई कविता का वैचारिक अन्तःसंघर्ष’, ‘हिन्दी कथा साहित्य : यथार्थवादी परम्परा’, ‘साहित्य इतिहास’, ‘काव्य परम्परा और लोकतांत्रिक दृष्टि’, ‘आधुनिक हिन्दी साहित्य : मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन’, ‘संस्कृति और समीक्षा के सवाल’ (साहित्य); ‘जनसंचार माध्यम और सांस्कृतिक विमर्श’, ‘जनसंचार माध्यमों का राजनीतिक चरित्र’, ‘जनसंचार के सामाजिक सन्दर्भ’, ‘जनसंचार माध्यमों का वैचारिक परिप्रेक्ष्य’, ‘जनसंचार माध्यमों का सामाजिक चरित्र’ (मीडिया); ‘जीवन की पाठशाला’ (संस्मरण); ‘हिन्दुस्तानी सिनेमा और संगीत : अशरफ़ अज़ीज़’, ‘अस्तित्ववाद और मानववाद : ज्यां पॉल सार्त्र’, ‘मुक्ति की सांस्कृतिक कार्रवाई : पाउलो फ्रेरे’ (अनुवाद); ‘हिन्दी साहित्य ज्ञानकोश’ (सह-सम्पादन)।
उन्हें इग्नू के शैक्षिक वीडियो ‘पल पल परिवर्तित प्रकृति वेश’ के लिए यूजीसी-सीईसी के ‘विषय विशेषज्ञ पुरस्कार’, ‘प्रोफ़ेसर कुँवरपाल सिंह स्मृति सम्मान’, ‘घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार’ और राजस्थान साहित्य अकादमी के ‘विशिष्ट साहित्यकार सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
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