मायानन्द मिश्र
आधुनिक मैथिली जगत के रससिद्ध कथाकार। मैथिली और हिन्दी दोनों में समान रूप से लेखन।
‘राजकमल’ से प्रकाशित अपने पहले उपन्यास ‘सोने की नैया माटी के लोग’ के लिए बहुचर्चित।
प्राचीन भारत विषयक कथा-योजना के अन्तर्गत तीन कथाकृतियों—‘प्रथमं शैलपुत्री च’, ‘मंत्रपुत्र’ और ‘पुरोहित’ की रचना।
सम्मान : ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित।
सहरसा कॉलेज, सहरसा (बिहार) में मैथिली विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहे।
निधन : 31 अगस्त, 2013

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