नन्द भारद्वाज
नन्द भारद्वाज हिन्दी और राजस्थानी के कवि, कथाकार, समीक्षक और संस्कृतिकर्मी हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—अंधार पख और आगै अंधारौ, दौर अर दायरौ, सांम्ही खुलतौ मारग, बदळती सरगम (राजस्थानी); झील पर हावी रात, हरी दूब का सपना, आदिम बस्तियों के बीच, आपसदारी, आवाज़ों के आसपास, संवाद निरन्तर, साहित्य परम्परा, नया रचनाकर्म, संस्कृति जनसंचार और बाज़ार (हिन्दी)। रेत पर नंगे पाँव, तीन बीसी पार, जातरा अर पड़ाव, साहित्य आलोचना री आधारभोम का सम्पादन किया। राजस्थानी साहित्यिक पत्रिका हरावळ का सम्पादन भी किया।
वे राजस्थान साहित्य अकादेमी की कार्यकारिणी के सदस्य, दूरदर्शन पुरस्कार ज्यूरी के सदस्य, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के रीजनल एडवाइजर रहे। 2015 से बिड़ला फाउंडेशन के बिहारी पुरस्कार की चयन समिति के अध्यक्ष रहे। दूरदर्शन केन्द्र जयपुर के वरिष्ठ निदेशक पद से सेवा-निवृत्त हुए।
उन्हें राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा नरोत्तमदास स्वामी गद्य पुरस्कार, मारवाड़ी सम्मेलन, मुम्बई द्वारा सर्वोत्तम साहित्य पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, दूरदर्शन विशिष्ट सेवा पुरस्कार, के.के. बिड़ला फाउंडेशन के बिहारी पुरस्कार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार तथा राजस्थानी भाषा साहित्य और संस्कृति अकादमी के सूर्यमल्ल मीसण शिखर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ई-मेल : [email protected]

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