ओका शूज़ो
ओका शूज़ो चालीस वर्ष की उम्र तक अपंग बच्चों के विद्यालय में अध्यापक के तौर पर कार्यरत रहे। तत्पश्चात् शरीर रोगग्रस्त रहने लगा। इन्होंने स्कूल की नौकरी छोड़ अपना पूरा समय लेखन-कार्य में लगाना आरम्भ किया। इन्होंने शरीर से लाचार बच्चों के अनुभवों को अपने लेखन का विषयवस्तु बनाया।

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