आयशा आरफ़ीन की कहानियाँ मेरे लिए ख़ुशगवार हैरत और मसर्रत का सबब बनी हैं। किसी भी नए लिखने वाले से ऐसी उम्मीद करना कि उनकी कहानियाँ मज़बूत और पुख़्ता हों, मुश्किल है लेकिन आयशा आरफ़ीन की कहानियों में एक ख़ास क़िस्म की मज़बूती भी है और इनकी बुनावट भी पुख़्ता है। ‘मिर्र’ की कहानियों की सतह बुलन्द है और प्लॉट, थीम और चरित्र-चित्रण के हवाले से भी ये कहानियाँ मुकम्मल हैं। इन सब से बढ़ कर आयशा आरफ़ीन के आख्यान एक अजीब से असरार से भरे हुए हैं जिसे हम रहस्य का नाम दे सकते हैं। यही तत्व उनकी कहानियों का सब से बड़ा जौहर (Essence) है जिसकी जड़ें उनके किरदारों के वजूदी-संकट (Existential Crisis) में अन्दर तक समाई हुई हैं।
मैं आयशा आरफ़ीन को इतनी उम्दा और दिल को छू लेने वाली कहानियाँ लिखने के लिए दिल से मुबारकबाद पेश करता हूँ और मुझे यक़ीन है कि उनका ये कहानी-संग्रह संजीदा साहित्यिक गलियारों में बड़े पैमाने पर स्वीकृति हासिल करेगा।
— ख़ालिद जावेद

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